
(दृश्य एक: एक सुनसान जगह, आकाश में बादल घने हैं। तीन विचित्र और रहस्यमय महिलाएँ आपस में बातें कर रही हैं।)
पहली जादूनी:
(निस्वार्थता से)
जब हम फिर मिलेंगे,
सूरज ढलने पर या चाँद की रोशनी में?
दूसरी जादूनी:
(हंसते हुए)
सूरज के ढलने पर, जब अंधेरा घेरता है,
तब हम फिर मिलेंगे।
तीसरी जादूनी:
(संदेह से)
क्या हमारे काम का समय आ गया है?
क्या वह आ रहा है?
पहली जादूनी:
(आश्वासन देते हुए)
हाँ, वह आ रहा है,
उसकी किस्मत का खेल शुरू होने वाला है।
दूसरी जादूनी:
(गंभीरता से)
उसकी आंतरिक इच्छाएँ उसे यहाँ लाएँगी,
जब तक हम उसे दिखाएँगे,
सत्ता की छाया में।
तीसरी जादूनी:
(खुश होकर)
फिर, जब धुंध छटेगी,
हम उसे अपने जाल में लपेट लेंगे।
सभी जादूनी:
(एक साथ)
हमें फिर से मिलना है,
धोखा, सच और पागलपन।
जो कुछ भी होगा,
हम उसे देखेंगे।
(जादूनी एक-दूसरे के हाथ थामती हैं और धीरे-धीरे अदृश्य हो जाती हैं।)
