
(दृश्य 1: एक कक्ष, रात का समय। लेडी मैकबेथ नींद में चल रही हैं। डॉक्टर और एक नर्स उन्हें देख रहे हैं।)
लेडी मैकबेथ:
(नींद में)
आह, हाथ धो लो! ये खून नहीं जाएगा!
(हाथों को रगड़ती हैं)
ये धब्बा, ये धब्बा!
जिसे मैं कभी मिटा नहीं सकती!
(बातें करते करते, वो गहरी सांस लेती हैं)
किसने कहा कि ये सब कुछ खत्म हो गया?
(वो डर गई हैं)
मुझे यकीन है कि ये सब सही होगा!
(हाथों को रगड़ते हुए)
खुद को धोना, खुद को धोना!
डॉक्टर:
(नर्स से)
देखो, ये किस कदर परेशान हैं।
इन्हें तो खुद से ही लड़ाई करनी है।
ये तो खुद को ही सजा दे रही हैं,
ये तो एक नई मुसीबत है।
नर्स:
(चौंकते हुए)
क्या ये सच में ऐसा कर रही हैं?
रात के इस सन्नाटे में,
किसी को भी पता नहीं चलेगा,
पर इनका दिल कह रहा है सब कुछ।
लेडी मैकबेथ:
(फिर से)
छोड़ दो मुझे!
ये खून मेरे हाथों पर है,
ये खून कभी नहीं जाएगा!
(वो चिल्लाती हैं, जैसे किसी को बुला रही हों)
मुझे बचाओ! बचाओ!
डॉक्टर:
(गंभीरता से)
इनकी परेशानियों का इलाज नहीं,
इन्हें खुद से ही लड़ना है।
अब समय है, हमें यहाँ से निकलना चाहिए,
ये तो खुद को ही खो चुकी हैं।
(लेडी मैकबेथ धीरे-धीरे कक्ष में चलती हैं, और वो चिंतित दिखते हैं।)
