Macbeth (हिन्दी अनुवाद): Act 2 Scene 4

(दृश्य: एक सुबह, एक राजमार्ग पर, एक पुराना व्यक्ति और एक युवा व्यक्ति बातचीत कर रहे हैं।)

(एक बूढ़ा व्यक्ति और एक युवक मंच पर प्रवेश करते हैं।)

बूढ़ा व्यक्ति:
(आसमान की ओर देखते हुए)
क्या तुमने देखा? रात में क्या हुआ?
राजा डंकन की हत्या के बाद, सब कुछ अजीब हो गया है।
आसमान भी जैसे रो रहा है।

युवक:
(चौंकते हुए)
बिल्कुल, सुनने में आया है,
बूढ़े लोग कहते हैं,
किसी बड़ी बुराई का संकेत है।
तूफान की रात,
और अब ये सब…
क्या यह केवल संयोग है?

बूढ़ा व्यक्ति:
(सिर हिलाते हुए)
संयोग नहीं, बेटा।
जैसे ही राजा की हत्या हुई,
सभी जीव-जंतु भी अजीब हो गए।
उल्लू रात भर चीखता रहा,
जैसे किसी की आत्मा निकल रही हो।
और अब देखो,
घोड़े भी एक-दूसरे को खाने लगे हैं।

युवक:
(विचार में)
यह तो बहुत अजीब है।
क्या यह सब कुछ एक ही बात का संकेत है?
बुराई का प्रभाव,
जैसे एक जंजीर में बंधे हों सब।

बूढ़ा व्यक्ति:
(गंभीरता से)
सच में, बेटा।
राजा डंकन की हत्या ने
समाज का संतुलन बिगाड़ दिया है।
अब सब कुछ उलट-पुलट हो गया है।
जो लोग अच्छे थे,
वह भी बुराई का रास्ता चुनने लगे हैं।

(दृश्य में एक सैनिक प्रवेश करता है।)

सैनिक:
(थका हुआ)
सुनो, क्या तुमने सुना?
राज्य का माहौल बुरा हो गया है।
हमारी सेना तैयार है,
लेकिन हमें एक नेता की जरूरत है।
किसी को तो आगे आना होगा।

बूढ़ा व्यक्ति:
(सिर हिलाते हुए)
किसी को तो आना होगा,
लेकिन क्या वह सही रास्ता दिखाएगा?
बुराई ने तो सबको अपने जाल में फंसा लिया है।

युवक:
(दृढ़ता से)
हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।
सच्चाई की जीत होगी,
इसका विश्वास रखो।

(सभी तीन लोग एक-दूसरे की ओर देखते हैं, जैसे किसी नई शुरुआत की उम्मीद कर रहे हों।)

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