
(एक कक्ष। मैकबेथ अकेला है, सोच में डूबा हुआ।)
मैकबेथ:
(अपने आप से)
क्या मैं यह करूँ? क्या मुझे उस गंदे काम को अंजाम देना चाहिए?
क्योंकि राजा डंकन, जो बुरा नहीं है, मेरे घर में मेहमान है।
उसकी मौत से क्या हासिल होगा?
अगर यह सब कुछ बुरा है, तो क्या मैं खुद को बर्बाद कर रहा हूँ?
महल में हत्या का ख्याल ही मुझे डरा देता है।
क्या मेरी आत्मा इस अपराध की सजा भोगेगी?
क्या यह केवल एक ख्वाब होगा, या फिर एक सच्चाई?
(वह दौड़ता है, और फिर रुकता है।)
मैकबेथ:
(जोर से)
नहीं, मैं ऐसा नहीं कर सकता!
नैतिकता की आवाज़ मुझे रोकती है।
पर फिर भी, अगर यह राजगद्दी का रास्ता है,
तो क्या मुझे इसे नहीं अपनाना चाहिए?
क्या मैं अपने कर्मों के परिणाम से डरूँ?
(लेडी मैकबेथ प्रवेश करती है।)
लेडी मैकबेथ:
(उत्सुकता से)
क्या हुआ, मैकबेथ?
तुम्हारी आँखों में क्या छिपा है?
क्या तुम डर गए हो?
क्यों तुम्हारा मन इतना विचलित है?
मैकबेथ:
(खुद को समेटते हुए)
नहीं, मैं डर नहीं रहा।
लेकिन…
क्या हमें इस हत्या का रास्ता अपनाना चाहिए?
क्या यह हमें सच में राजगद्दी दिलाएगा?
लेडी मैकबेथ:
(दृढ़ता से)
तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं।
हम इस काम को अंजाम देंगे।
अगर तुम्हारे मन में कोई संदेह है,
तो उसे दूर करने का यही समय है।
किसी को शक नहीं होगा,
हम इसे आसानी से छुपा सकते हैं।
मैकबेथ:
(सहमति में सिर हिलाते हुए)
ठीक है।
अगर तुम मेरे साथ हो,
तो मैं इस भयानक काम को करूँगा।
लेकिन क्या यह सच में हमें खुशियाँ देगा?
लेडी मैकबेथ:
(आक्रामकता से)
खुशियाँ?
हमें केवल शक्ति चाहिए।
तुम्हें अपने डर को छोड़कर आगे बढ़ना होगा।
बस एक बार यह कर लो, और सब कुछ तुम्हारा होगा।
(मैकबेथ और लेडी मैकबेथ एक-दूसरे को देखकर संकल्पित होते हैं।)
