Macbeth (हिन्दी अनुवाद): Act 1 Scene 4

(स्थान: एक महल का आंगन। डंकन, मैकबेथ, बैनको और अन्य दरबारी मौजूद हैं।)

डंकन:
(आश्चर्य से)
मैकबेथ, तुमने मुझे इन वीरता की कहानियों से भरा दिया है। तुम्हारी बहादुरी ने हमारे दुश्मनों को हरा दिया।

मैकबेथ:
(नम्रता से)
मालिक, यह तो मेरा कर्तव्य था। आपसे मिली प्रशंसा के लिए धन्यवाद।

डंकन:
(प्रसन्नता से)
तुम्हारी सेवाओं के लिए, मैं तुम्हें थाने का उपहार दूंगा।

बैनको:
(शंकित)
मालिक, क्या यह उचित है कि हम इस कृतज्ञता को दिखाएं?

डंकन:
(सुनिश्चित करते हुए)
बिल्कुल। मुझे अपने वफादारों को पुरस्कृत करना चाहिए।

मैकबेथ:
(भीतर ही भीतर)
(मन में)
यह सब कुछ मेरे लिए एक नई शुरुआत है। क्या यह समय है मेरे भाग्य को गले लगाने का?

डंकन:
(मैकबेथ की ओर)
मैं तुम्हें थाने का उपहार दूंगा, और तुम मेरी उम्मीदों पर खरे उतरोगे।

मैकबेथ:
(सहमति में सिर झुकाते हुए)
आपकी उम्मीदें मेरे लिए सर्वोपरि हैं।

(सभी लोग हंसते हैं और एक साथ आगे बढ़ते हैं।)

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