
(स्थान: इंग्लैंड का एक कक्ष। मैकडफ और माल्कम बात कर रहे हैं।)
माल्कम:
(संकोच में)
क्या तुम्हें यकीन है, मैकडफ?
क्या तुम सच में मुझे बताने आए हो?
क्या तुम मुझ पर विश्वास करोगे?
मैं तो खुद अपने अंदर विश्वास नहीं कर पा रहा हूँ।
मैकडफ:
(गंभीरता से)
राजा, तुम अपने शब्दों में हिचकिचा रहे हो।
तुम्हारी स्थिति में, मुझे तुम्हारा विश्वास होना चाहिए।
तुम्हारी बातें सुनकर मेरी आत्मा को शांति मिलती है।
माल्कम:
(थोड़ा चिंतित)
क्या तुम समझते हो कि मैं सही हूँ?
क्या तुम मेरी परीक्षा लेना चाहोगे?
क्या तुम मेरी नीयत पर शक करते हो?
मैकडफ:
(आत्मविश्वास से)
नहीं, तुम मेरे लिए एक योग्य राजा हो।
तुम्हारी नीयत पर मेरा विश्वास है।
तुम्हें इस दुष्टता को खत्म करना होगा।
तुम्हें अपनी शक्ति दिखानी होगी।
(सभी सन्नाटे में।)
माल्कम:
(गंभीरता से)
ठीक है, मैं तुम्हें बताता हूँ।
अगर मैं इस पद पर बैठता हूँ,
मैं तुमसे वादा करता हूँ कि मैं न्याय करूंगा।
मैं एक ऐसा राजा बनूंगा जो अपने लोगों की भलाई के लिए काम करेगा।
मुझे अपनी जिम्मेदारी समझ में आ गई है।
(दोनों हाथ मिलाते हैं, एकजुटता का प्रतीक।)
