चरवाहा और जंगली बकरियां short moral stories in hindi for class 1

short moral stories in hindi for class 1

चरवाहा और जंगली बकरियां short moral stories in hindi for class 1

एक बार की बात है बकरी चराने वाला चरवाहा हर रोज अपनी बकरियों को लेकर के हर दिन चरने के लिए ले जाया करता था।


 
तो 1 दिन चरवाहा जब शाम को अपनी बकरियों को चरा करके शाम को घर वापस आ रहा था।
 
 
तो उसके रास्ते में, कुछ जंगली बकरियों का झुंड उसके बकरियों के बीच मिल गया।
 
 
                        
 
तो रमेश उनको जंगली बकरियों को भी अपने साथ घर ले आता है।
 
 
और उसके अगले दिन भारी  बर्फबारी होती है और बकरियों को बाहर तो बिल्कुल भी नहीं निकाला जा सकता था।
 
 
तो उस दिन रमेश ने अपने बकरियों को सिर्फ खाने के लिए ही पर्याप्त भोजन दिया था।
 
 
लेकिन वहीं दूसरी तरफ रमेश जंगली बकरियों को लंबे समय तक रहने की उम्मीद है अच्छी तरह से खाना देता था।
 
           
 
वह सोचता था कि यह जंगली बकरियां भी अब मेरे साथ ही रहेगी और इन्हें जाने नहीं दूंगा इसलिए उनका ज्यादा ध्यान रखा करता था।
 
 
और जब बर्फ पिघलती है अगले दिन,तुझे बकरी चरने के लिए बकरियों को बाहर ले जाता है रमेश।
 
 
तो वह जंगली बकरी या अपने-अपने जंगल में भाग जाती है।
 
 
जंगली बकरियां कहती है कि आप एक कृतज्ञ प्राणी हो।
 
 
तो रमेश चिल्लाता है और जंगली बकरियों को कहता है कि,
 
 
 
 
मैंने अपनी बकरियों से ज्यादा तुम्हारी देखभाल की थी और अब तुम मुझे ही छोड़ कर जा रहे हो।”
 
 
तो इस पर रमेश को जंगली बकरियां जवाब देती है कि उन्होंने उस पर भरोसा नहीं किया अपनी पहली वाली बकरियों पर।
 
और उसने नहीं बकरियों के लिए अपनी पुरानी बकरियों की ज्यादा उपेक्षा की थी।
 
 
और जंगली बकरी या रमेश से कहती है कि हो सकता है एक दिन तुम मेरे साथ भी ऐसा ही करो जैसा कि उन बकरियों के साथ तुमने किया।
 
 
 
 
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