
(स्थान: मैकबेथ का किला। मैकबेथ और उसके सैनिकों के बीच एक भयावह माहौल है।)
(दृश्य शुरू होता है। मैकबेथ मंच पर अकेले खड़ा है, उसकी आँखों में चिंता और निराशा की छाया है।)
मैकबेथ:
(आसमान की ओर देखते हुए)
कितना अंधेरा है यह सब!
क्या कोई भी इस रात के साए को दूर कर सकता है?
मेरी आत्मा की शांति कहीं खो गई है।
क्या एक साधारण आदमी की तरह जीना
अब मेरे लिए संभव है?
(थोड़ी देर रुकता है)
दुख की घड़ी में,
यह भीख मांगने की आदत नहीं है।
क्या मैं अपने डर को नहीं भगा सकता?
(वह गहरी सांस लेता है)
अब तो मेरी मौत का भी कोई डर नहीं।
(वह आगे बढ़ता है)
अब जब जीवन एक बुरा सपना बन गया है,
तो क्या फर्क पड़ता है?
हम सब बस एक क्षणिक धुंध हैं,
जो किसी समय में थी,
फिर अचानक गायब हो जाती है।
कितनी मूर्खता है यह!
(वह चिल्लाता है)
खुशियाँ, जो असल में कभी थीं ही नहीं!
ओह, मैं तो बस एक धुंधला सपना हूँ,
जिन्हें किसी ने भी नहीं देखा।
(सैनिक प्रवेश करते हैं, वे घबड़ाए हुए हैं।)
सैनिक:
(उदासीनता से)
राजा, दुश्मन हमारे दरवाजे पर हैं!
उनका आक्रमण शुरू हो चुका है।
मैकबेथ:
(गुस्से में)
तो वे आ गए हैं!
क्या वे समझते हैं कि मैं डरूँगा?
मैंने अपनी तलवार से डर को काट दिया है।
अब मैं किसी भी चीज़ से नहीं डरता!
(वह अपने सैनिकों की ओर मुड़ता है)
फिर से एक बार,
अपने खून की गर्मी में,
हम उनकी धज्जियाँ उड़ाएंगे।
उन्हें पता चल जाएगा कि
मैकबेथ का नाम सुनने में
कितना भयावह है!
(मंच पर धुंआ छाने लगता है।)
सैनिक:
(चिंता में)
लेकिन, महाराज,
क्या हम अकेले हैं?
हमारे पास तो अब कुछ ही लोग बचे हैं!
वे तो संख्या में कई गुना अधिक हैं।
मैकबेथ:
(आसमान की ओर ताकते हुए)
संख्या से क्या होता है?
हमारी हिम्मत और साहस
उनकी सेना से अधिक है।
आगे बढ़ो,
इस बुरे समय का सामना करो!
(वह अपने सैनिकों को प्रेरित करता है)
हमारे लिए यह लड़ाई
जीवन और मृत्यु का खेल है।
अपनी आत्मा को बचाने के लिए!
(वह चिल्लाता है)
आओ, चलो,
हमारे दुश्मनों को दिखा दें
कि हम यहाँ हैं,
और हम लड़ेंगे!
(दृश्य का अंत।)
