
(दृश्य 3)
स्थान: डंकेन की किला, एक छोटा कमरा।
*(मैकबेथ अपने दरबारियों के साथ खड़ा है, चिंतित और परेशान।)
मैकबेथ:
(खुद से)
किसी भी हालत में, मैं ऐसा नहीं होने दूंगा!
मेरे हाथ में जो कुछ भी है, मैं उसे नहीं छोड़ूंगा।
(दरबारी से)
तुम्हें पता है कि हम अब किन मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।
(दरबारी)
हां, महाराज। दुश्मन हमारी ओर बढ़ रहे हैं।
(मैकबेथ)
(गंभीरता से)
मुझे उनकी संख्या का कोई डर नहीं है।
मैं तो सिर्फ अपनी तलवार और अपने नाम की ताकत पर भरोसा करता हूं।
(अवसादित)
इन भूतिया ख्यालों ने मुझे कमजोर कर दिया है।
(फिर से खुद से)
पर मैं हार नहीं मानूंगा।
(दरबारी)
लेकिन, महाराज, क्या हमें बचाव की तैयारी नहीं करनी चाहिए?
(मैकबेथ)
(गुस्से में)
खामोश!
मेरे पास हर चीज़ है जो मुझे चाहिए।
यह किला मेरा है, और मैं इसे किसी भी कीमत पर बचाऊंगा।
(फिर से सोचते हुए)
मेरे दुश्मन मुझे कभी भी मात नहीं दे सकते।
मैंने पहले ही बहुत कुछ सहा है,
और मुझे विश्वास है, कि मैं इस बार भी जीतूंगा।
(एक पल के लिए रुकते हुए)
लेकिन…
(दुखी आवाज में)
क्या मेरी ताकत मुझे धोखा दे रही है?
(दृश्य समाप्त होता है।)
